रामपुर में आज दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़न कॉलेज की बहुविषयक सोसायटी के लगभग 40 से 50 छात्र-छात्राओं एवं 4 संकाय सदस्यों का शैक्षणिक दल रामपुर रज़ा पुस्तकालय और संग्रहालय पहुँचा। इस भ्रमण का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, पांडुलिपियों और संग्रहालय परंपराओं का प्रत्यक्ष अध्ययन करना रहा। 🎓📖
इस अवसर पर पुस्तकालय में विद्यार्थियों के लिए एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसका संचालन आस्था भारती झा ने किया और अंत में सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम ने छात्रों को रज़ा पुस्तकालय के ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराया। 🏛️✨
रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने विद्यार्थियों के समक्ष संस्थान के गौरवशाली इतिहास, संग्रह एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामपुर रियासत की स्थापना 1774 में नवाब फैजुल्लाह खान ने की थी, जो ज्ञान और साहित्य के संरक्षक थे। उन्होंने पुस्तकों और पांडुलिपियों का अमूल्य संग्रह तैयार किया, जिसे आने वाली पीढ़ियों ने और समृद्ध किया। 📚🌿
उन्होंने कहा कि वर्ष 1905 में निर्मित हामिद मंज़िल, जिसे आज रामपुर रज़ा पुस्तकालय के नाम से जाना जाता है, अपनी अद्भुत वास्तुकला के कारण ‘किताबों का ताजमहल’ कहलाता है। इसकी चार मीनारें विश्व की चार प्रमुख आस्थाओं—मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा और मंदिर—का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो रामपुर की बहुसांस्कृतिक परंपरा और सौहार्द का प्रतीक हैं। 🕌⛪🕍🏯
उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में यह पुस्तकालय रज़ा ट्रस्ट और 1975 में भारत सरकार के अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व की संस्था बना। यहाँ 21 भाषाओं में दुर्लभ पांडुलिपियाँ, ग्रंथ और कलाकृतियाँ सुरक्षित हैं। पुस्तकालय ज्ञान, शोध और सांस्कृतिक संवाद का एक केंद्र बन चुका है। 🌏📘
डॉ. मिश्र ने बताया कि रज़ा पुस्तकालय ने हाल ही में एक विश्व-स्तरीय अकादमिक अध्ययन एवं अनुवाद संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे बहुभाषायी अनुसंधान और सांस्कृतिक संवाद को और प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा — “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” — अर्थात् सभी दिशाओं से हमारे पास कल्याणकारी विचार आएँ। यही भारतीय संस्कृति की आत्मा है और रज़ा पुस्तकालय इसी भावना का प्रतीक है। 🌸📜
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पुस्तकालय के विभिन्न अनुभागों, संग्रहालय और संरक्षण प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान पुस्तकालय की टीम ने दुर्लभ पांडुलिपियों, कैटलॉगिंग और दरबार हॉल की कलाकृतियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। छात्रों ने इस यात्रा को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। 🎨📖
रज़ा पुस्तकालय आज भी भारत की बहुभाषायी, बहुसांस्कृतिक और बहुविषयी पहचान का प्रतीक है, जो ज्ञान और सौहार्द का संदेश देता है। यह स्थान न केवल इतिहास की धरोहर है, बल्कि आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। 🌺🇮🇳
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❓FAQs
Q1. What was the main purpose of the visit by St. Stephen’s College students?
A1. The main purpose of the visit was to study the cultural heritage, manuscripts, and museum practices preserved at Rampur Raza Library.
Q2. Why is the Rampur Raza Library called “Taj Mahal of Books”?
A2. The library’s architectural beauty, historical significance, and its four symbolic minarets representing major faiths make it known as the “Taj Mahal of Books.”
📊 Poll: आपकी राय में ऐसे शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के लिए कितने उपयोगी हैं?
1️⃣ अत्यंत उपयोगी — ज्ञान और संस्कृति से जुड़ाव बढ़ाते हैं।
2️⃣ औपचारिक गतिविधि — सीमित प्रभाव।
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